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क याजानेवालावचन-पऽ 67 14 अनुबंध 4- 14 जनवर 2013 क छठ याज दर सहायता योजना म शािमल इं जिनय रंग माल क 134 टै रफ लाइन 68 15 अनुबंध 5- याज दर सहायता योजना म शािमल इं जिनय रंग माल क 101 टै रफ लाइन पर 24 मई 2013 का प रपऽ 76 2 बप व व- पया /व देशी म

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Academic year: 2022

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(1)

माःटर प र पऽ

पया / व देशीमुिािन यातऋण

तथािन यातक कोमाहकसेवापरमाःटरप र पऽ व षयवःतु

व वरण

ब.सं. पृ सं.

क ूयोजन 4

ख वग करण 4

ग प छले समे क त अनुदेश 4

घ ूयो यता क याि 4

ूःतावना 6

भाग-क - पया िन यात ऋण

1 पोतलदानपूव पया िन यात ऋण 6

2 पोतलदानो र पया िन यात ऋण 18

3 मािन त िन यात - र यायती पया िन यात ऋण 25

4 पया िन यात ऋण पर याज 26

भाग-ख - व देशी मुिा म िन यात ऋण

5 व देशी मुिा म पोतलदानपूव िन यात ऋण (पीसीएफसी) 33

6 व देशी मुिा म पोतलदानो र िन यात ऋण 43

7 व देशी मुिा म िन यात ऋण पर याज़ 48

भाग-ग - िन यात ऋण- माहक सेवा, िन यात ऋण द ए जाने से संबंिध त ब या व िध का सरलीकरण और र पोट भेजने संबंधी अपे ाएं

8 माहक सेवा तथा काय व िध का सरलीकरण 50

9 र पोटभेजनेसंबंधीअपे ाएँ 60

10 ह रा िन यातक को लदानपूव ऋण कां फ ल ट डायमंडस ् 61 11 अनुबंध 1 - िन यात ऋण क समी ा के िल ए ग ठ त कायदल क

िस फा र श

62

12 अनुबंध 2 - िन यातऋण डाटा (सं व तरण /बकाया) 65 13 अनुबंध 3 - ह रामाहक सेूा क याजानेवालावचन-पऽ 67

14 अनुबंध 4- 14 जनवर 2013 क छठ याज दर सहायता योजना शािमल इं जिनय रंग माल क 134 टै रफ लाइन

68

15 अनुबंध 5- याज दर सहायता योजना म शािमल इं जिनय रंग माल क 101 टै रफ लाइन पर 24 मई 2013 का प रपऽ

76

2

बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

(2)

16 अनुबंध 6 - याज दर सहायता योजना म शािमल व माल क 6 टै रफ लाइन पर 24 मई 2013 का प रपऽ

81

17 प र िश I - पया िन यात ऋण - प र पऽ 82 18 प र िश II - व देशी मुिा म िन यात ऋण - प र पऽ 98 19 प र िश III- िन यात ऋण - माहक सेवा - प र पऽ 101

3

बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

(3)

पया / व देशी मुिा िन यात ऋण तथािन यातक कोमाहकसेवापरमाःटरप र पऽ क. ूयोजन

भारतीय र ज़व बक ारा समय-समय पर जार िनयातक के िलए िन यात ऋण और माहक सेवासंबंधीिन यम/ व िन यम औरःप ीकरण कासमेकन

ख. वग करण

बककार व िन यमन अिध िन यम, 1949 क धारा 21 और 35क ारा ूद श य का ूयोग करते

हुए र ज़व बक ारा जार एक सां व िध क िन देश ग. प छले समे क त अनुदेश

यह माःटर प र पऽ प र िश म सूचीब प र पऽ और वष के दौरान जार क ए गए ःप ीकरण म

िन ह त सभी अनुदेश को समे क त तथा अ तन करता है ।

ूयो यता क याि

ेऽीय मामीणबक कोछोड़करसभीअनुसूिच तवा ण यबक परलागू। संरचना

भाग-क

पया िन यात ऋण

1. पोतलदानपूव पया िन यात ऋण 2. पोतलदानो र पया िन यात ऋण

3. मािन तिन यात -र यायती पयािन यातऋण 4. पया िन यात ऋण पर याज़

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बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

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भाग-ख

व देशीमुिामिन यातऋण

5. व देशी मुिा म पोतलदानपूव िन यात ऋण 6. व देशी मुिा म पोतलदानो र िन यात ऋण

7. व देशी मुिा म िन यात ऋण पर याज़ भाग-ग

िन यात ऋण- माहक सेवा, िन यात ऋण द ए जाने से संबंिध त ब या व िध◌ का

सरलीकरण और र पोट भेजने संबंधी अपे ाएं

8. माहक सेवा तथा ब या व िध का सरलीकरण

9. र पोट भेजने संबंधी अपे ाएं

10. ह र के िन यातक को पोतलदानपूव ऋण - कॉन ल ट डायमंड

अनुबंध 1 िन यातऋणसमी ाहेतुग ठ तकायदलक िस फा र श 11.

अनुबंध 2 िन यात ऋण के आंकड़े (व तरण/ बकाया) 12.

अनुबंध 3 ह र के माहक से वचनपऽ 13.

प र िश I पया िन यात ऋण -प र पऽ 14.

प र िश II व देशीमुिामिन यातऋण - प र पऽ 15.

प र िश III िन यातऋण - माहकसेवा- प र पऽ 16.

5

बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

(5)

ूःतावना

िन यातऋणयोजना

भारतीय र ज़व बक ने 1967 म पहली बार िन यात व पोषण क योजना लागू क । इस योजना का

उ ेँय था िन यातक को अंतरा ीय याज दर के अनु प दर पर अ पाविध कायशील पूँजी व उपल ध कराना। भारतीय र ज़व बक िन यात ऋण के िल ए केवल याज क उ चतम दर िन धा र त करता है। तथा प, बक भारतीय र ज़व बक ारा िन धा र त उ चतम दर से कम दर लगा सकते ह।

बचमाक मूल उधार दर (बीपीएलआर) तथा ःूेड द शािन दश को यान म रखते हुए तथा

उधारकताओं का प छला र काड और जो ख म िन धारण को व चार म लेकर बक उ चतम दर के

भीतर याज दर का िन णय कर सकते ह।

बक के ऋण उ पाद के याज-दर िन धारण म पारदिश ता बढ़ाने के िल ए बक को यह सूिच त क या गया था क वे (i) िन िध य क वाःत व क लागत, (ii) प र चालन के खच और (iii)

ूावधान करने क व िन यामक आवँयकता/पूँजी ूभार और लाभ का मा ज न कवर करने के िल ए यूनतम मा ज न को यान म रखते हुए बचमाक मूल उधार दर (बीपीएलआर) िन धा र त कर।

तथा प वष 2003 म ूारंभ क गई बीपीएलआर ूणाली उधार दर म पारदिश ता लाने के अपने

मूल उ ेँय को पाने म असफल रह । इसका मु य कारण यह था क बीपीएलआर ूणाली के

अंतगत बक बीपीएलआर से कम दर पर उधार दे सकते थे। इसी कारण बक क उधार दर म र ज़व बक क नीित दर के संचरण का मू यांकन करना भी क ठ न था।

तदनुसार बचमाक मूल उधार दर पर ग ठ त कायदल (अ य : ौी द पक मोहंती) क िस फा र श के आधार पर बको को सूिच त क या गया क वे 1 जुलाई 2010से आधार दर ूणाली म अंत र त हो

जाएं।आधार दर ूणाली का उ ेँय है बक क उधार दर म अिध क पारदिश ता लाना और मौ ि क नीित के संचरण का बेहतर मू यांकन करना। 1 जुलाई 2010 से लागू होने वाली आधार दर ूणाली

के अंतगत पया िन यात ऋण अिम म क सभी अविध पर लागू होने वाली याज दर आधार दर के बराबर अथवा उससे अिध क ह।

6

बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

(6)

भाग - क पयािन यातऋण

1. पोतलदानपूविन यातऋण

1.1 पया पोतलदानपूव ऋण /पै कंग ऋण

1.1.1 प र भाषा

पोतलदानपूव /पै कंग ऋण क सीबक ारा क सी िन यातक को मंजूर क या गया या द या

गया ऐसा ऋण या अिम म है जो भारत से बाहर ःथ त क सी आयातक ारा िन यातक या

क सी अ य य के प म खोले गए साख-पऽ के आधार पर या भारत से वःतुओं/सेवाओं

के िन यात के िल ए पु और अप र वतनीय आदेश या िन यातक या क सी अ य य को

भारत से बाहर िन यात करने संबंधी आदेश के क सी अ य साआय के आधार पर (बशत

िन यात आदेश द ए जाने या बक म साखपऽ खोले जाने से छूट न दे द गई हो) पोतलदान से

पहले वःतुओं के बय, ूसंःकरण, व िन माण या पै कंग काय / सेवाएं देने के िल ए कायकार पूंजीगत यय के िल एअपे त व के पमउपल धकरायागयाहो।

1.1.2 अिम मक अविध

(i) पै कंग ऋण संबंधी अिम म क तनी अविध के िल ए द या जाए, यह ू येक मामले म माल ूा करने/सेवाएं ूदान करने म लगने वाले समय, उसके

व िन माण या ूसंःकरण (जहाँ आवँयक हो) और माल को जहाज पर लादने म लगने वालेसमय पर िन भर करेगा। यह मु यत: बक का दािय व है क वह व िभ न प र ःथ ित य का यान रखते हुए ःवयं िन धा र त करे क पै कंग ऋण संबंधी अिम म क तनी अविध के िल ए द या जाए ता क िन यातक को इतना समय िम ल सके क वह माल को जहाज म लाद सके/ सेवाएं

ूदान कर सके।

(ii) अिम म क तार ख से 360 द न के भीतर य द िन यात संबंधी दःतावेज

ूःतुत करके पोतलदानपूव अिम म समायोित नह ं कर द या जाता तो

िन यातक को द ए गए अिम म पर ूारंभ से ह र यायती याज दर क सु व धा

नह ं द जाएगी।

(iii) भारतीय र ज़व बक केवल 180 द न तक क अविध के िल ए ह पुन व उपल ध कराएगा ।

7

बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

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1.1.3 पै कंग ऋण का सं व तरण

(i) सामा यत:, मंजूर क या गया ू येक पै कंग ऋण अलग-अलगखाते के प म रखा जानाचा ह ए ता क मंजूर क अविध और ऋण के उ उपयोग पर नजर रखी जा सके ।

(ii) आदेश /साख-पऽ के काया वयन के िल ए बक पै कंग ऋण एक बार म या

आवँयकता के अनुसार कई चरण म उपल ध करा सकते ह ।

(iii) िन यात क जानेवाली वःतुओंके ूकार केआधार पर (जैसे बंधक, बंधक

इ या द) बक ूसंःकरण, व िन माण इ या द व िभ न चरण पर अलग- अलग खाते रख सकते ह तथा वे यह सुिन त कर क ऐसे खात के बकाया

शेष का समायोजन, एक खाते से दूसरे खाते म अंतरण ारा और अंततोग वा

बय, छूट, इ या द के उपरांत संबंिध त िन यात-दःतावेज क आय से, कर

िल याजाताहै।

(iv) बक को ऋण क रािश के उ उपयोग पर कड़ नजर रखनी चा ह ए तथा

यह सुिन त करना चा ह ए क कम याज दर पर उपल ध कराये गए ऋण का उपयोग िन यात संबंधी वाःत व क आवँयकताओं के िल ए ह क या जा

रहा है। बक को िन यात संबंधी आदेश के ठ क समय से काया वयन के

मामलेमिन यातक ाराक जारह कारवाईपरभीनजररखनीचा ह ए। 1.1.4 पै कंग ऋण का प र समापन

(i) सामा य

क सी िन यातक को ःवीकृत क या गया पै कंग ऋण /पोतलदानपूव ऋण को िन यात क गई वःतुओं क खर द, छूटआ द केबाद बनाएगए ब ल क ूाि य म सेप र समा क या जाए।

इस ूकार पोतलदान पूव ऋण को पोतलदानो र ऋण म प र वित त कर द या जाएगा। इसके

साथ ह, िन यातक और बकर के बीच आपसी सहमित के अधीन इसे, व देशी मुिा अजक व देशीमुिाखाते (ईईएफसीखाते) केशेषतथािन यातक ारा क एगएवाःत व किन यात के बराबर िन यातक के पय के संसाधन से भी चुकता/समय से पूव अदा क या जा सकता

है। य द ऋण का इस ूकार प र समापन/ चुकौती न हो सके तो बक पैरा 4.2.3 म दशाए गए अनुसार अिम म क ित िथ से याज क दर िन धा र त करने के िल ए ःवतंऽ ह।

(ii) िन यातमू यसेअिध कपै कंगऋण

(क) जहाँउप-उ पादकािन यात क याजासकताहो

8

बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

(8)

ज न मामल म काजू इ या द जैसे कृ ष-उ पाद के ूसंःकरण के कारण होने वाली

कमी के चलते िन यातक पै कंग ऋण को समा करने के िल ए समान मू य का

िन यात ब ल ूःतुत नह ं कर सकता है, उनम बक िन यातक को, अ य बात के

साथ-साथ, इसबात क अनुमित देसकते ह कवे काजूकातेल इ या दजैसेउप- उ पाद से संबंिध त आह र त िन यात ब ल ारा अिध क पै कंग ऋण का समापन कर सक ।

(ख) जहाँ आंिश क घरेलू ब ब क जा सकती हो ले क न तंबाकू, काली िम च, इलायची, काजूइ या दजैसेकृ ष-आधा र तउ पाद केिन यातकेमामलेम, िन यातकउ पादथोड़ अिध क माऽा म खर दे तथा उसे िन यात यो य व न िन यात यो य ौे ण य म रखे और केवल िन यात यो य ौेणी क वःतुओं का ह िन यात करे। न िन यात यो य शेष उ पाद क ःथानीय ब ब अिन वायहै। ज सपै कंग ऋणमऐसीनिन यातयो यवःतुएँशािम ल ह, उनम बकोके िल ए आवँयक है क वे पै कंग ऋण द ए जाने क तार ख से ह, घरेलू

अिम म पर लगाए जाने वाले याज क दर से वा ण य क दर पर याज ल और पै कंग ऋण के उतने भाग के िल ए भारतीय र ज़व बक से पुन व क कोई सु व धा ूा नह ं होगी ।

ग) ड ऑय ड/ड फैटेडकेककािन यात

बक िन यातक कोएच पी एस मूँगफली तथा ड ऑय ड/ड फैटेड केक के िन यातक को पै कंग ऋण अिम म मंजूर कर सकते ह ले क न यह रािश अपे त क चे माल के

मू य क सीमा तक होनी चा ह ए, भले ह उसका (क चे माल का) मू य िन यात आदेश के मू य से अिध क हो। िन यात आदेश से अिध क रािश काअिम म र यायती

याजदर लगाएजानेकेिल एतभीपाऽहोगाजब कउसका समायोजननकद प म या शेष उप-उ पाद तेल क ब ब ारा अिम म क तार ख से तीस द न के भीतर कर द या जाए।

(iii) तथा प, बको को इस बात क प र चालनगत छूट है क वे अ छे शैक र काड वालेिन यातक कोिन निल ख तछूट ूदानकरसक:

(क) िन यात दःतावेज क आय से पै कंग ऋण क चुकौती/का समापन क या जाता

रहेगा। ले क न ऐसा, िन यातक ारा िन यात क गई क सी अ य वःतु या उसी

वःतु से संबंिध त अ य आदेश से संब िन यात दःतावेज से भी क या जा सकता

है। सं व दा के इस ूकार ूित ःथापन क अनुमित देते समय बको को यह सुिन त करना चा ह ए क ऐसा करना वा ण य क से आवँयक और 9

बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

(9)

अप र हाय है। बक को उन कारण से संतु हो लेना चा ह ए क क सी खास वःतु

के पोतलदान केिल ए द यागया पै कंगऋण सामा य तर के से समा य नह ं क या जा सकता। य द िन यातक ने संबंिध त बक म खाता खोल रखा है या य द सहायतासंघग ठ त क यागयाहैऔर इससंघके सदःय ने अनुमितदेद है तो

सं व दा के ूित ःथापन क अनुमित यथासंभव द जानी चा ह ए ।

ख) वतमान पै कंग ऋण का समापन क सी ऐसे िन यात दःतावेज क आय से भी क या

जा सकता है ज सके आधारपरिन यातकनेकोईपै कंग ऋणनह ंिल याहै। फ र भी ऐसा संभव है क िन यातक क सी एक बक से पै कंग ऋण लेकर संबंिध त दःतावेज क सी दूसरे बक म ूःतुत कर दे । इस संभावना को गत रखते हुए बक ऐसी सु व धा यह सुिन त करने के बाद उपल ध कराएँ क िन यातक ने

ूःतुत क ए गए दःतावेज के मा यमसे क सी अ य बक से पै कंग ऋण नह ं

िल याहै।

(ग) सहयोगी संःथाओं /अधीनःथ संःथाओं/उसी समूह क अ य संःथाओं को ऐसी

छूट नह ं ूदान क जानी चा ह ए ।

1.1.5 `चालूखाता' सु व धा

(i) जैसा क ऊपर बताया गया है, िन यातक को पोतलदानपूव ऋण सामा यत: साखपऽ या

िन यात संबंधी प का आदेश ूःतुत क ए जाने के बाद ूदान क या जाता है । यह पाया गया है

क कुछ मामल म क चे माल क उपल धता क सी खास मौसम म ह होती है, कुछ अ य मामल म िन यात संबंधी सं व दा के अनुसारमाल के िन यात के िल एजो समय-सीमािन त क गयी होती उसक तुलना म उस माल के व िन माण और उसके पोतलदान म अिध क समय लगता है। कई मामल म व देशी खर ददार से साख-पऽ /प का िन यात आदेश ूा होने क आशा के आधार पर भी िन यातक को क चा माल खर दकर िन यात यो य वःतु का िन माण करकेपोतलदानके िल ए तैयाररखना पड़ता है। ऐसेमामल म, पया पोतलदानपूव ऋणूा

करने म िन यातको को हो रह क ठ नाइय को गत रखते हुए बक को इस बात के िल ए अिध कृत क या गया है क◌ वे अपने व वेक के आधार पर, साख-पऽ या प का आदेश के पूव

ूःतुतीकरण हेतु जोर डाले ब ना भी, क सी भी वःतु के मामले म पोतलदान पूव ऋण `चालू

खाता' (रिनंग एकाउंट) सु व धा ूदान कर ले क न ऐसी ःथ ित म िन निल ख त शत भी लागू

ह गी :

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बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

(10)

(क) बक `चालू खाता' सु व धा केवल ऐसे िन यातक को उपल ध कराएँ ज नका शैक र काड अ छा हो। यह सु व धा िन यात मुख इकाइय/मु यापार ेऽ/

िन यातूसंःकरण ेऽ म ःथ तइकाइय कोभीद जासकतीहै।

(ख) ज न मामल म पोतलदानपूव ऋण चालू खाता सु व धा ूदान क जाए उन सब म साखपऽ/प का आदेश उपयु अविध के भीतर ूःतुत क या जाना

चा ह ए तथा ऐसी अविध का िन धारण बक करगे ।

(ग) एक-एक िन यात ब ल जैसे-जैसे बेचान /संमह के िल ए ूा ह बको को

चा ह ए क पहले ऋण का पहले समापन के आधार पर सबसे पहले के बकाया

पोतलदानपूव ऋण का समापन कर। यह कहने क आवँयकता नह ं है क ऊपर बताए गए तर के से पोतलदानपूव ऋण का समापन करते समय बक को यह सुिन त करना चा ह ए क र यायती दर पर ूदान क ए गए क सी

भीपोतलदानपूव ऋणक अविधमंजूर क अविध या 360 द न, दोन म से

जो भी पहले हो, से अिध क न होने पाए ।

(घ) पै कंग ऋण का समापन ऐसे िन यात दःतावेज क आय से भी क या जा

सकताहै ज सकेआधारपरिन यातकनेकोईपै कंगऋणनह ंिल याहै। (ii) य द यह पाया जाए क िन यातक इस सु व धा का दु पयोग कर रहे ह तो यह

सु व धातुरंतवापस लेलीजाए ।

(iii) ज न मामल म िन यातक शत का पालन नह ं करगे उनम अिम म पर ूारंभ से

ह वा ण य क दर पर याज लगाया जाएगा। ऐसे मामल म संबंिध त पोतलदानपूव ऋण केमामल मबक ारा र ज़वबकसे िल एगए पुन व पर उ चतर दर पर याज का भुगतान क या जाना होगा । ऐसे सभी मामल क

र पोट मौ ि क नीित व भाग, भारतीय र ज़व बक, कि य कायालय, मुंबई - 400001 को भेजी जानी चा ह ए ता क वह पुन व पर लगाए जाने वाले याज क दरिन तकरसके।

(iv) उप-आपूित कताओं को चालू खाता सु व धा नह ं ूदान क जानी चा ह ए ।

1.1.6 पै कंग ऋण पर याज

याज दर का व वरण तथा उससे संबंिध त अनुदेश पैरामाफ 5 म द ए गए ह ।

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बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

(11)

िन यात संबंधी अिम म भुगतान वाले बक सा ट इ या द क आय के आधार पर िन यात ऋण

1.1.7

(i) ज न मामल म िन यातक को िन यात के िल ए भुगतान के प म व देश से चेक, सा ट इ या द के प म सीधे ूेषण ूा ह, उनम अ छे शैक र काड वाले िन यातक को बक

व देश से ूा चेक, सा ट इ या द क आय क वसूली तक क अविध के िल ए र यायती

याज दर पर िन यात ऋण मंजूर कर सकते ह परंतु ऐसा, इस बात से संतु होने के बाद क या जाना चा ह ए क यह क सी िन यात आदेश पर आधा र त है, संबंिध त वःतुओं के

मामले म यापा र क ूथाओं के अनु प है और ूचिल त िन यम के अनुसार िन यात संबंधी

आय क वसूली का यह अनुमो द त तर का है ।

(ii) य द◌ उपयु शत पूर न क ए जाने तक क सी िन यातक कोसामा य वा ण य क याज दरपर सहायता मंजूरक गयी हैतो उपयु शत बाद म पूर कर िल एजाने पर बकपीछे

क तार ख से र यायती दर पर याज लगा सकते ह और िन यातक को याज दर म अंतर क रािश वापस कर सकते ह ।

1.2 खास ेऽ/खंड को पयापोतलदानपूवऋण

1.2.1 रा य यापार िन गम/खिन ज और धातु यापार िन गम याअ य िन यात गृह, एजे स य इ या द के मा यम से क ए गए िन यात के िल ए िन माता आपूित कताओं को पया

िन यात पै कंग ऋण

(i) बक ऐसे िन माता आपूित कताओं को िन यात पै कंग ऋण मंजूर कर सकते ह ज नके पास

िन यात आदेश साखपऽ नह ं ह और माल का िन यात रा य यापार िन गम/खिन ज और धातु यापारिन गम या अ यिन यात गृह, एजे स य इ या दके मा यम से क या जाता

है।

(ii) ऐसे अिम म पुन व के िल ए पाऽ ह गे, बशत, सामा य शत के अलावा िन निल ख त शत का भी पालन क या गया हो:

क) बक को िन यात गृह से एक पऽ ूा करना चा ह ए ज सम िन यात आदेश तथा

उसके उस भाग का व वरण द या गया हो ज से आपूित कता ारा पूरा क या

जाना है तथा ज सम यह ूमाण पऽ द या गया हो क िन यात गृह ने आदेश के

12

बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

(12)

उस भाग के िल ए, ज से आपूित कता ारा पूरा क या जाना है, कोई पै कंग ऋण सु व धा नतोलीहैऔरनह बादमऐसीसु व धालेगा।

ख) बक को चा ह ए क वह आपसी व चार- व मश करके तथा िन यात गृह और आपूित कता (यािन दोन प ) क िन यात संबंधी आवँयकताओं को यान म रखते हुए उन दोन - अथात ् िन यात गृह और आपूित कता के बीच पै कंग ऋण क इस अविध को व भा ज त कर देगा ज सके िल ए र यायती दर पर याज लगाया जानाहै। पोतलदानपूव ऋण पर िन धा र त अविधतक र यायती दरपर लगाया जाने वाला याज िन यात गृह/एजे सी और आपूित कता दोन को

िम लाकर ह िल या जाएगा।

ग) िन यात साखपऽ या आदेश का अपे त व वरण देते हुए िन यात गृह को

आपूित कताकेप मदेशीसाखपऽखोलदेनाचा ह एतथापै कंगऋणखातेसे

संबंिध त बकाय को, ऐसे देशी साखपऽ के अंतगत ब ल का बेचान करके, समा क या जाना चा ह ए। य द िन यात गृह के िल ए आपूित कता के प म देशी साखपऽ खोलना असु व धाजनक हो तो आपूित कता को चा ह ए क वह

िन यात के िल ए आपूित क ए गए माल के संबंध म िन यात गृह पर ब ल का

आहरण करे और ऐसे ब ल से ूा आय से पै कंग ऋण संबंधी अिम म का

समायोजनकरे।य द ऐसी यवःथाके अंतगतआह र त ब ल केसाथ लदान- पऽ या िन यात संबंधी अ य दःतावेज न ह तो बक को हर ित माह के अंत म आपूित कता के मा यम से िन यात गृह से इस आशय का ूमाणपऽ ूा करना

चा ह ए क◌ इस यवःथा के अंतगत आपूित क गयी वःतुओं का वःतुत:

िन यात क या गया है। ूमाण-पऽ म संबंिध त ब ल क तार ख, रािश और बक का नाम द या जाना चा ह ए ज सके मा यम से ब ल का बेचान क या गया है । घ) बक को आपूित कता से इस आशय का वचन पऽ ूा करना चा ह ए क

संबंिध त िन यात आदेश के िल ए िन यात गृह से य द कोई अिम म भुगतान ूा

होगातोउसेपै कंगऋण खातेमजमाकर द याजाएगा। 1.2.2 उप-आपूित कताओं को पया िन यात पै कंग ऋण

जैसा क◌ िन यात आदेश धारक तथा िन माता आपूित कता के बीच होता है, उसी ूकार िन यात आदेश धारकतथा िन याित त माल के क चेमाल, घटक इ या द के उप-आपूित कताके बीच भी

पै कंगऋण व भा ज त क याजासकताहैपर तुइसमामलेमिन निल ख तशतलागू ह गी : (क) योजना के अंतगत चालू खाता सु व धा ूदान नह ं क जाएगी। योजना के अंतगत,

िन यात गृह/ यापार गृह/ःटार यापार गृह इ या द या िन माता िन यातक के प म

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बप व व- पया /देशी मुिा िन यात ऋण तथा िन यातक को माहक सेवा पर माःटर प र पऽ-2013

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ूा िन यात आदेश या इनसे संबंिध त साखपऽ ह शािम ल ह गे। िन यातक के अ छे शैक र काडकेआधारपरह इसयोजनाकालाभउसे द याजानाचा ह ए।

(ख) िन यात आदेशधारक के बकर देशी साखपऽ खोलगे। साखपऽ म उस माल का व वरण द या जाएगा ज सक आपूित उप-आपूित कता ारा िन यात संबंधी लेनदेन के अंग के

प म, आदेश धारक को ूा िन यात आदेश या साख-पऽ के आधार पर िन यात क जानेवाली है । ऐसे साखपऽ के आधार पर उप-आपूित कता का बकर कायशील पूँजी के

प म िन यात पै कंग ऋण मंजूर करेगा ता क उप-आपूित कता ऐसी वःतुओं का

िन माण कर सके ज नक आवँयकता िन यात क जाने वाली वःतुओं के िल ए होती है।

माल क आपूित के बाद, साखपऽ खोलनेवाला बक खोले गए देशी साखपऽ के आधार पर ूा देशी दःतावेज को आधार मानकर उप-आपूित कता के बक को भुगतान कर देगा। इसके बाद ऐसे भुगतान िन यात आदेश धारक का िन यात पै कंग ऋण हो जाएँगे ।

(ग) यह िन यात आदेश धारकपर िन भरकरताहै क वहूा आदेशया साखपऽक समम सीमा के भीतर, अपने बकर /बक के सहायता संघ के नेता के अनुमोदन से, अपे त वःतुओं के िल ए क तने साखपऽ खोले। प र चालनगत सु व धा को गत रखते हुए यहसाखपऽ खोलने वालेबक पर िन भरकरता है क वह साखपऽखोले जाने के िल ए यूनतमरािश क तनी िन धा र त करे।आपूित कता(ओं) ारा य गत या पृथक प से तथा िन यात आदेशधारक ारा िल ए गए पै कंग ऋण क कुल अविध िन यात क गयी

वःतुओं के िल ए अपे त सामा य उ पादन चब के भीतर होनी चा ह ए । सामा यत:, कुल अविध क गणना उप-आपूित कताओंम से क सी एक ारापै कंग ऋण के ूथम आहरण क तार ख से िन यात आदेश धारक ारा िन यात दःतावेज के ूःतुतीकरण क तार ख तक क जाएगी ।

(घ) िन यात आदेश धारक िन यात आदेश या व देश म खोले गए साखपऽ के अनुसारमाल केिन यातके िल एउ रदायीहोगातथा इस ू ब याम क सीूकार के व ल बके िल ए वह समय-समय पर लागू क ए जा रहे दां ड क ूावधान के अंतगत कारवाई का पाऽ होगा। उप-आपूित कता ारा देशी साखपऽ क शत के अनुसार िन यात आदेशधारक को

मालउपल धकरा द एजानेकेबाद, इसयोजनाकेअंतगतउसका दािय वस पा द त मान िल या जाएगा तथा िन यात आदेशधारक य द क सी ूकार से व ल ब करेगा तो

ऐसे व ल ब के िल ए उप-आपूित कता पर कोई दां ड क ूावधान लागू नह ं होगा ।

(ङ) यह योजना िन याित त माल के मामले म, िन यात आदेश धारक तथा िन माता के बीच पै कंग ऋण क ह ःसेदार क वतमान यवःथा के अलावा एक अित र सु व धा

है, जैसा क उ पैरा 1.2.1 म बताया गया है। इस योजना के अंतगत उ पादन चब का

केवल ूथम चरण ह शािम ल होगा। उदाहरण के िल ए, क सी िन माता िन यातक को

ऐसे सामान के अपने िन कटतम आपूित कता के प म देशी साखपऽ खोलने क

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अनुमित द जाएगी जो िन यातयो य वःतुओं के िन माण के िल ए आवँयक ह । इस योजना का लाभ ऐसे िन कटतम आपूित कताओं को क चे माल/सामान क आपूित करनेवाल कोनह ं द याजाएगा। य दिन यातआदेशधारकमाऽ यापारगृहहैतोयह सु व धा उस िन माता से आरंभ करके शु करायी जाएगी ज से यापार-गृह ने िन यात आदेश हःतांत र त क या है।

(च) िन यात के ूयोजन हेतु क सी दूसर िन यातो मुख इकाई /िन यात ूसंःकरण ेऽ को

माल क आपूित करने वाली िन यातो मुख इकाई /िन यात ूसंःकरण ेऽ/ व शेष आिथ क ेऽ भी इस योजना के अंतगत पया पोतलदानपूव िन यात ऋण ूा करने

का पाऽ ह गे। तथा प िन यातो मुख इकाई /िन यात ूसंःकरण ेऽ / व शेष आिथ क

ेऽक आपूित कताइकाई क सी पोतलदानो रसु व धाके िल एपाऽनह ंहोगी य क इस योजना के अंतगत वःतुओं क उधार ब ब शािम ल नह ं है ।

(छ) इस योजना के अंतगत अिम म क कुल रािश या अविध म कोई प र वतन करने का

व चार समा ह त नह ं है। तदनुसार, देशी िन यात साखपऽ ूणाली के अंतगत उप- आपूित कता को अिम म द ए जाने क तार ख से िन यात आदेश धारक ारा उसे समा

क ए जाने क तार ख तक और िन यात आदेशधारक ारा वःतुओं के पोतलदान के

मा यम से पै कंग ऋण का प र समापन क ए जाने क तार ख तक इस यवःथा के

अंतगत द या गया ऋण िन यात ऋण माना जाएगा और इसके िल ए संबंिध त बक उपयु अविध के िल ए र ज़व बक से पुन व सु व धा ूा करने का पाऽ होगा। यह सुिन त क या जाना चा ह ए क एक ह चरण के क सी लेनदेन के िल ए दो बार

व पोषणन क याजाए ।

(ज) िन यात ऋण गारंट िन गम से उपयु बीमा सु व धा ूा करने के िल ए बक ऐसे अिम म केिल एिन यातऋण गारंट िन गमसेसंपककरसकतेह।

(झ) इस योजना के अंतगत उप-आपूित कता ारा िन यात आदेश धारक /िन माता को ऋण द एजानेकेसंबंधमकोईबातनह ंकह गयीहै।अत: साखपऽखोलनेवालेबक ारा, भुगतान को िन यात आदेशधारक का िन यात पै कंग ऋण मानकर ह, दःतावेज के

ूःतुतीकरणकेआधारपरउप-आपूित कताओंकोभुगतान क याजानाहै। 1.2.3. िन माण ठेकेदार को पया पोतलदानपूव ऋण

(i) िन माण ठेकेदार को व देश म ूा ठेक को पूरा करने के िल ए उनक ूारंिभ क कायशील पूँजीसंबंधी आवँयकताओंको पूरा करनेके िल ए पै कंग ऋण अिम म,

व देश से ूा सुिन त सं व दा के आधार पर, एक अलग खाते म द ए जाने

चा ह ए। ले क न ऐसे अिम म ठेकेदार से इस आशय का वचनपऽ ूा करने के बाद ह द एजानेचा ह ए कउ ह सं व दासंबंधी कायपूराकरनेकेिल एूारंिभ क यय 15

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के प म, अथात व देश म सं व दा पूर करने के ूयोजन हेतु उपभो य वःतुएँ

खर दने और आवँयक तकनीक ःटाफ के आवागमनपर खचइ या द हेतु, उ व क आवँयकताहै।

(ii) अिम म कासमायोजन, सं व दासंबंधी ब ल काबेचान करकेया व देशमपूर क गयी सं व दा के संबंध म व देश से ूा ूेषण ारा, अिम म क तार ख से 180

द न के भीतर क या जाना चा ह ए। खाते म बकाया ज तनी रािश का समायोजन

िन धा र त तर के से नह ं हो पाता है, उतनी रािश के िल ए बक सामा य दर पर याजलगासकतेह।

(iii) सेवाओं के िन यात स ह त प र योजना िन यात सं व दाओं का काम करने वाले

िन यातक कोभारतीय र ज़वबक, व देशी मुिा व भाग, के ि यकायालय, मुंबई

ारा समय-समय पर जार क ए गए द शािन दश/अनुदेश का पालन करना

होगा ।

1.2.4सेवाओंकािन यात

यापार के सामा य करारके अधीन आनेवाली यापारयो य सभी 161 सेवाओंके िन यातक को

पोतलदानपूव तथापोतलदानो र व उनसेवाओंकोूदान क याजाए जहांऐसीसेवाओंके िल ए भुगतान 2009-14 क व देश यापार नीितके अ याय 3 म बताये अनुसार मु व देशी मुिा म

ूा होता है । इस प र पऽ के सभी ूावधान जब तक अ यथा िन द न क या जाए तब तक यथोिच त प र वतन स ह त िन यातसेवाओंके िन यातपर उसीतरह लागू ह गे जैसे क वःतुओंके

िन यातपर लागू ह गे।सेवाओंक सूचीएचबीपीवी1केप र िश 10म द गयी है। व पोषक बक को यह सुिन त करना चा ह ए क कोई देाहरा व पोषण न हो तथा िन यात ऋण व देश से ूा

होनेवाले ूेषण से चुकाया जाता है । िन यात ऋण मंजूर करते समय बक िन यातक

/

व देश ःथ त काउंटर पाट के शेक र काड को यान म रख । ऐसेसेवा ूदाताओं से िन यातसे ूा य रािश य के

व वरणका व देश ःथ तपाट सेूा देयरािशके व वरणकेसाथिम लान क याजाए।

कारोबार के िभ न

-

िभ न ःव प और िन यात जानेवाली सेवाओं ौे ण बड़ सं या

तथा ूगामी अ व िन यमन के वातावरण को देखते हुए

,

जहां ूबंधन संबंधी मामल का

अलग

-

अलग व पोषक बक ारा िन णय करने के िल ए छोड़ द या गया है

,

बक अपने ःवयं के

मानदंडबनासकतेह।

सेवाओं के िन यातक उपभो ा वःतुओं

,

वेतन आपूित आ द के िल कायकार पूंजीगत िन यात ऋण (पोतलदानपूवऔर पोतलदानो र)हेतुपाऽह।

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बकयहसुिन तकर क

-

• ूःतावसेवाओंकेिन यातकावाःत व कमामलाहै।

• सेवािन यातक मदएचबीपीवी1केप र िश 10केअंतगतआतीहै।

• िन यातक यथालागू इलै शॉिन क ए ड सॉ टवेयर ई पी सी अथवा सेवाएं ई पी सी अथवा

भारतीयिन यातसंगठनमंडलमपंजीकृतहै।

• सेवाकेिन यातहेतुिन यातसं व दाहै।

• कायशीलपूंजीगत यय केप र ययऔर सेवाउपभो ा या व देशम उसक मूलसंःथासे

भुगतान क वाःत व कूाि केबीचअंतरालहै।

• वैध कायकार पूंजीगत अंतराल है अथात ् पहले सेवा ूदान क जाती है जब क◌ इ वाइस तैयार करने के कुछ समय बाद भुगतान ूा क या जाता है ।

• बक कोयहसुिन तकरना चा ह ए ककोईदोहरा/अित र व पोषणनहो।

• द याजानेवालािन यातऋणय द कोईमा ज नअपे तहोतोउसेघटाकरअ जत व देशी

मुिा, ूा अिम म भुगतान/ऋण से अिध क न हो ।

• इ वाइस तैयार क जाती ह ।

• आवक ूेषण व देशी मुिा म ूा होते ह ।

• कंपनी वहां सं व दा के अनुसारइ वाइस तैयार करेगी जहांभुगतान व देश ःथ त पाट से

ूा होताहै, सेवािन यातकबकसेिल ये गयेिन यातऋण क चुकौती केिल एिन िध य का

इःतेमाल करेगा ।

1.2.5पुंपो पादन, अंगूर और कृ ष-आधा र त अ य उ पाद के िल ए पोतलदानपूव ऋण

(i) पुंपो पादन के मामले म, फूल इ या द क खर द तथा फूल तोड़े जाने के बाद पोतलदान के िल ए क ए गए सभीखच को पूराकरने के िल ए पोतलदानपूव ऋण

द याजाताहै।

(ii) तथा प फूल से संबंिध त उ पाद, अंगूर और कृ ष-आधा र त अ य उ पाद का

िन यात बढ़ाने के िल ए फूल, अंगूर क खेती, इ या द के िल ए उवरक, क टनाशक व अ य सामान के बय स ह त सभी कृ ष-आधा र त उ पाद के

िन यात से संबंिध त गित व िध य के िल ए कायशील पूँजी के ूयोजन हेतु बक र यायती दर पर ऋण उपल ध करा सकते ह पर तु शत यह होगी क बक इस

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ःथ ित म ह क वे ऐसी गित व िध य क पहचान िन यात से संबंिध त गित व िध के पमकर सकतथाइनक िन यातसंबंधी संभा यताओंकेबारेम ःवयंसंतु

हो सक, और साथ ह ये गित व िध याँ नाबाड या क सी अ य एजसी क

ू य /अू य व पोषण योजना के अंतगत शािम ल न ह । यह ऋण प कंग ऋण के मामले म उसक अविध, माऽा, प र समापन इ या द से संबंिध त सामा य शत पर द या जा सकता है ।

(iii) िन वेश के िल ए, जैसे व देशी ूौ ोिग क, उपकरण का आयात, भूिम व कास इ या द, या क सी ऐसी मद के िल ए ज से कायशील पूँजी न माना जा सके,

िन यात ऋण नह ं द या जाना चा ह ए।

1.2.6 ूसंःकरणकताओं / िन यातक को िन यात ऋण-कृ ष िन यात ेऽ

(i) देश म कृ ष िन यात को बढ़ावा देने के िल ए भारत सरकार ने कृ ष िन यात जोन बनाए ह। कृ ष िन यातो मुख इकाईयां (संसाधन) कृ ष िन यात जोन के भीतर तथा बाहर भी ःथा प त क जाती ह तथा ऐसी इकाईय को बढ़ावा देने के िल ए उ पादनएवं ूसंःकरण कोएक कृतकरना होगा। उ पादक को क सान के साथ कृ ष का अनुबंध करना होगा तथा क सान के उस समूह को गुणकार बीज, क टनाशक, माइबो यूश एंटस और अ य साममी क उपल धता सुिन त करवानी होगी ज ससे उ पादक, िन यात के िल ए उ पाद तैयार करने वाले क चे

माल के तौर पर क सान के उ पाद खर दग। उस समूह को अ छ गुणव ा के

बीज, क टनाशक सूआम पोषक तîव तथा अ य सामान क आपूित सुिन त करेगा। इसिल ए सरकार ने सुझाव द या है क क सान को संबंिध त सामान क खर द तथा आपूित के िल ए वतमान द शािन दश के अंतगत ऐसी ूसंःकरणकता

इकाइय को पैëकग ऋण द या जाये ता क क सान को अ छ गुणव ा वाले

सामान उपल ध हो सक ज ससे अ छ गुणव ा वाली फसल को उगाया जाना

सुिन त क या जा सके। िन यातकता ऐसे सामान थोक म खर द /आयात कर सकगे ज सके चलते माऽा म वृ होने के कारण वःतुएँ सःती पड़गी।

(ii) िन यातक ारा क सान को आपूित क ये गये सामान को बक िन यात क जाने

वाली वःतुओं से संबिध त क चा माल समझ और क सान ारा ऐसी फसल उगाये जाने के िल ये उ ह अपे त सामान क लागत को पूरा करने के िल ये

ूसंःकरणकताओं / िन यातक को ऋण / िन यात ऋण मंजूर करने पर व चार कर ता क कृ ष संबंधी उ पाद के िन यात को बढ़ावा िम ल सके । इससे ूसंःकरणकता

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इकाइयाँ अपे त सामान थोक म खर द सकगी और पूव-िन त यवःथा के

अनुसार क सान कोउनक आपूित करसकगी ।

(iii) बक कोयह सुिन त करना होगा क िन यातक ने खर द जानेवाली फसल के

िल ए क सान सेऔर िन यात क ये जानेवालेउ पाद केिल ए व देशी खर दार से

अपे त समझौता कर रखा है। व ीय सु व धा ूदान करने वाले बक को कृ ष

िन यात ेऽ मे þःथत प र योजनाओं का मू यांकन करना होगा तथा यह सुिन त करना होगा क बय/ व बय संबंधी यवःथाएं संभव ह तथा

प र योजनाएँउपयु अविधकेभीतरकायाþ वतक जासकगी।

(iv) िन िध य के उ उपयोग पर अथात ् िन यातक /मु य ूसंःकरणकता इकाई ारा

क गयी यवःथा के अनुसार, फसल उगाने के िल ये िन यातक ारा क सान को

सामान के व तरणपर, बक कोनजररखनीहोगी।

(v) बक कोयहसुिन तकरना होगा कूचिल तअनुदेश केअनुसारपोतलदानपूव ऋण के समापन के िल ये मंजूर क शत के अनुसार ूसंःकरणकता /िन यातकता

इकाईयाँ अंित म उ पाद का िन यात कर रह ं ह।

2. पोतलदानो र पयािन यातऋण

2.1 प र भाषा

`पोतलदानो र ऋण' क सी संःथा ारा, भारत से वःतुओं/सेवाओं का िन यात करने वाले को, मंजूर क या गया ऋण या अिम म या कोई अ य ऋण है जो व देशी मुिा व भाग ारा व िन द वसूली क अविध के अनुसार वःतुओं के पोतलदान/सेवाएं ूदान करने के बाद ऋण उपल ध कराए जाने क तार ख से आरंभ करके िन यात संबंधी आय क वसूली क तार ख तक, के िल ए होता है तथा इसके अंतगत शु क वापसी के ूित फलःव प या उसक ूित भूित के आधार पर

क सी िन यातक को मंजूर क या गया कोई ऋण या अिम म या सरकार ारा समय-समय पर द ए गए ूो साहन के प म िन यातक को क या गया कोई नकद भुगतान शािम ल है। व देशी मुिा

व भाग के मौजूदा अनुदेश के अनुसार िन यात आय क वसूली के िल ए व िन द अविध पोतलदानक तार खसे 12 मह नेतकहै।

2.2 पोतलदानो र ऋण के ूकार:

पोतलदानो र अिम म मु यत: िन निल ख त प म हो सकते ह :

(i) खर दे गए/ब टाकृत/बेचे गएिन यात ब ल।

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